अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचा चंद्रयान-2, ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत

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श्रीहरिकोटा। आज का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक है, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो ने चंद्रयान-2 को अंतरिक्ष में पहुंचाकर इतिहास रच दिया है। ये पूरी तरह से स्वदेशी मिशन है।

चंद्रयान-2 को लेकर ‘बाहुबली’ रॉकेट दोपहर 2.43 मिनट पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रवाना हुआ। रॉकेट ने चंद्रयान-2 को ठीक 16 मिनट में अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचा दिया।

‘एवेंजर्स एंडगेम’ से भी कम है चंद्रयान-2  की लागत

चंद्रयान-2 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग पर इसरो के चेयरमैन डॉ के सिवन ने कहा, ‘हमने चंद्रयान-2 की तकनीकी दिक्कत दूर कर इस मिशन को अंतरिक्ष में भेजा। इसकी लॉन्चिंग हमारी सोच से भी बेहतर हुई है। चांद की तरफ भारत की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत हुई। चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। उन्होंने कहा कि अभी टास्क खत्म नहीं हुआ है। हमें अपने अगले मिशन पर लगना है।’

आखिरी 15 मिनट होंगे सबसे अहम

डॉ के सिवन के मुताबिक चंद्रयान-2 की लैंडिंग के अखिरी के 15 मिनट सबसे अहम होंगे, जब लैंडर ‘विक्रम’ चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला होगा। उन्होंने कहा कि मिशन पूरी तरह से कामयाब सबित होगा और चंद्रमा पर नई चीजों की खोज करने में सफल रहेगा।

चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने की जिम्मेदारी इसरो ने अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल- मार्क 3 (जीएसएलवी-एमके 3) को दी थी। 640 टन वजनी रॉकेट की लागत 375 करोड़ रुपये है। इस रॉकेट को ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है।

चंद्रयान-2 से चांद पर जाने को तैयार है भारत, 2:43 मिनट का इंतज़ार

‘बाहुबली’ ने 3.8 टन वजन वाले चंद्रयान-2 को लेकर उड़ान भरी। चंद्रयान-2 की कुल लागत 603 करोड़ रुपये है। अलग-अलग चरणों में सफर पूरा करते हुए चंद्रयान को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने में लगभग 48 दिन लगेंगे । ये यान 7 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर उतर सकता है। अब तक दुनिया के केवल तीन देशों अमेरिका, रूस व चीन ने चांद पर अपना यान उतारा है। 2008 में भारत ने चंद्रयान-1 लॉन्च किया था। यह एक ऑर्बिटर अभियान था। ऑर्बिटर ने 10 महीने तक चांद का चक्कर लगाया था। चांद पर पानी का पता लगाने का श्रेय भारत के इसी अभियान को जाता है।