आजीवन प्रतिबंध के खिलाफ श्रीसंत की याचिका पर फैसला सुरक्षित

दिल्ली । आजीवन प्रतिबंध के खिलाफ तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। श्रीसंत पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की तरफ से आजीवन प्रतिबंध लगाया गया है । श्रीसंत आईपीएल-2013 में स्पॉट फिक्सिंग का दोषी पाए गए थे । 

श्रीसंत ने आजीवन प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी । बीसीसीआई ने अदालत में दलील दी है कि श्रीसंत भ्रष्टाचार, सट्टेबाजी में शामिल रहे हैं और इन्होंने खेल की बदनामी की है। 

न्यायाधीश अशोक भूषण और न्यायाधीश के.एम. जोसेफ की पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा है। अदालत की तरफ से श्रीसंत और बीसीसीआई से दो हफ्ते के भीतर लिखित जवाब देने को कहा  गया है। 

बीसीसीआई की तरफ से अदालत में वरिष्ठ वकील पराग त्रिपाठी ने कहा कि खेल में भ्रष्टाचार और सट्टेबाजी की सज़ा आजीवन प्रतिबंध है। त्रिपाठी ने इस मसले पर बीसीसीआई की जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि श्रीसंत ने कभी भी बीसीसीआई की भ्रष्टाचार रोधी ईकाई के सामने इस बात का जिक्र नहीं किया था कि सट्टेबाजों ने उनसे संपर्क साधा। बीसीसीआई ने अदालत में कहा कि श्रीसंत ने उन 10 लाख रुपये के स्रोत के बारे में भी जांच समिति को नहीं बताया, जिसका जिक्र टेलीफोन पर की गई बातचीत में किया गया है। 

श्रीसंत के वकील सलमान खुर्शीद हैं, अदालत में इन्होंने दलील दी कि बीसीसीआई ये साबित करे कि 10 लाख रुपए मैच फिक्सिंग से संबंधित हैं । टेलीफोन पर हुई बातचीत को लेकर खुर्शीद ने दलील दी कि लेनदेन तब होता जब खिलाड़ी एक ओवर में 14 रन से कम देता। सलमान खुर्शीद ने अदालत से अपील की श्रीसंत  में अभी भी क्रिकेट को लेकर जुनून बाकी है और इनके करियर को बर्बाद होने से बचाया जाए । 

इससे पहले की सुनवाई में श्रीसंत ने कहा था कि उन्होंने दिल्ली पुलिस के दबाव में जुर्म कबूला था। 

आईएएनएस इनपुट के साथ