अयोध्या विवाद पर मध्यस्थता समिति को नहीं मिली सफलता

AyodhyaPhoto Credit: Twitter UP Tourism

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद पर नियुक्त मध्यस्थता समिति मंदिर-मस्जिद विवाद को हल कर पाने में सफल नहीं हो पाई है। लगातार कोशिशों के बाद भी ये समिति दोनों पक्षों को एकमत करने में नाकामयाब रही है । जिसके बाद अब इस मामले की सुनवाई सर्वोच्च अदालत में रोज़ाना की जाएगी। सुनवाई 6 अगस्त से शुरू होगी।

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सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या की विवादित ज़मीन का मसला सुलझाने के लिए एक मध्यस्थता समिति का गठन किया था। इस समिति में जाने-माने लोग शामिल थे, जिन्हें सहमति बनाने के लिए जाना जाता है। इस तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति की अगुवाई शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एफ.एम.कलीफुल्ला कर रहे थे। इस समिति ने 1 अगस्त को अपना निष्कर्ष सर्वोच्च अदालत को सौंपा था।

सूत्रों के मुताबिक इस मामले के विभिन्न पक्ष कभी मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं हुए। वास्तव में मध्यस्थता उन पर थोपी गई थी। कई प्रस्ताव रखे गए, लेकिन किसी भी एक प्रस्ताव को पक्षों ने स्वीकार नहीं किया, जिससे कि सर्वसम्मति बन पाती।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में कुल 14 अपील दाखिल की गई हैं।