आत्मविश्वास से शांतिलक्ष्मी ने तय किया गृहिणी से सरकारी नौकरी तक का सफ़र

एन. शांतिलक्ष्मीएन. शांतिलक्ष्मी अपनी बेटी के साथ

चेन्नई | हरिवंश राय बच्चन की एक पंक्ति है ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’। इसे साबित कर दिखाया तमिलनाडू के थेनी जिले की शांतिलक्ष्मी ने जिन्होंने राज्य सेवा आयोग की परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल कर ली है। 47 साल की उम्र में तीन बेटियों की मां एन. शांतिलक्ष्मी को स्वास्थ्य विभाग में नौकरी मिली है ।

शांतिलक्ष्मी बीए और बीएड हैं लेकिन उन्होंने 2014 से पहले नौकरी करने के बारे में नहीं सोचा । 2014 में अपने पति के अचानक निधन होने की वजह से शांतिलक्ष्मी के कंधों पर परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी आ गई । तीन बेटियों की जिम्मेदारी और आर्थिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए एन शांतिलक्ष्मी ने नौकरी की तलाश शुरू कर दी।

शांतिलक्ष्मी ने साथ में अपनी बेटियों की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी ताकि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर सकें । हालांकि, शांतिलक्ष्मी ने कभी नहीं सोचा था कि वो भी दोबारा पढ़ाई शुरू करेंगीं ।

शांतिलक्ष्मी ने सरकारी नौकरी की तैयारियों के लिए अपनी बेटी का दाखिला एक कोचिंग संस्थान में कराने का फैसला किया और यहीं से उनकी जिंदगी बदल गई । उन्हें पता चला कि तमिलनाडु लोक सेवा आयोग की समूह चार के खाली पदों के लिए आवेदन की कोई उम्र सीमा नहीं होती । इसके बाद शांतिलक्ष्मी ने भी लोक सेवा आयोग की परीक्षा देने का फैसला किया ।

अपनी बेटी और उनके उम्र के बच्चों के साथ पढ़कर शांतिलक्ष्मी अब सरकारी नौकरी पा चुकी हैं । उनकी बेटी ने भी परीक्षा पास कर ली है और अब दोनों मिलकर अपना घर चला रही हैं ।

आईएएनएस इनपुट के साथ