कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं असम के चमुआ गांव के किसान

प्रतीकात्मक तस्वीर

मौसम अगर साथ ना दे तो किसानों को अक्सर परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाढ़ आए या सूखा, किसानों के लिए दोनों हीं हालात से निपटना चुनौतीपूर्ण होता है, कई बार फसल बर्बाद हो जाती है और किसान कर्ज़ में डूब जाते हैं । हालांकि कई ऐसे तरीके हैं जिन्हें अपनाकर नुकसान को नफे में बदला जा सकता है । असम के लखीमपुर के चमुआ गांव के किसानों ने ये साबित कर दिखाया है ।

इस गांव में किसानों ने खेती के आधुनिक तरीके अपनाए हैं, पारंपरिक फसलों को छोड़कर मुनाफा देने वाली फसलों की खेती शुरू की है । इसकी बदौलत अब किसान मुनाफा कमाने लगे हैं । गांव की तस्वीर बदलने की इबारत लिखी है कृषि वैज्ञानिकों ने ।

कम समय में ज्यादा उत्पादन

वैज्ञानिकों  की सलाह पर किसानों ने धान के उन बीजों को बोना शुरू किया है जो कम समय में ज्यादा उत्पाद देते हैं । इससे उन्हें ज्यादा फसल मिलती है और जल्दी खेत खाली होने से किसान दूसरी फसल भी उगा पाते हैं । वैज्ञानिकों ने किसानों को धान के ऐसे बीज दिए जिसकी फसल तीन महीने में तैयार हो जाती है,  इसके बाद किसान आलू उगाते हैं। आलू के बाद किसान सब्जियों की खेती करते हैं । इससे खेत की मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है और किसानों को ज्यादा मुनाफा होता है । कई बार धान की खेती से हुए नुकसान की भरपाई सब्जियां बेचकर हो जाती है ।

पॉली हाउस में करते हैं खेती

किसानों ने वैज्ञानिकों की सलाह पर लो कॉस्ट पॉली हाउस बनाकर सब्जियों की खेती शुरू की है । किसान असम की प्रसिद्ध भूत जोलोकिया उगाते (ghost pepper) हैं । ये दुनिया की सबसे तीखी मिर्च है । इसकी खेती सिर्फ असम में होती है जिसकी वजह से इसकी काफी डिमांड है । इस मिर्च की खेती से किसान अच्छा खासा मुनाफा कमा लेते हैं।

पानी का संरक्षण करते हैं किसान

इसके अलावा किसानों ने बारिश के पानी का संरक्षण भी शुरू किया है जो सूखे के दिनों में उनके लिए काफी मददगार है । गांव के किसानों ने मिलकर गांव के 13 बेकार पड़े तालाबों को पुनर्जीवित कर दिया है । अब उन्हें सिंचाई में दिक्कत नहीं होती, इससे पैदावार भी अच्छी हो गई है ।

किसानों में बनाया अपना सीड बैंक

किसानों ने मिलकर अपना सीड बैंक भी बना लिया है। अगर बाढ़ की वजह से उनकी फसल खराब हो भी जाए तो उन्हें अगले सीजन में बीज के लिए भटकना नहीं पड़ता । इसके अलावा किसानों ने सामुदायिक नर्सरी भी बनाई है ।  चमुआ गांव के किसानों से प्रेरणा लेकर अब बाकी गांवों के किसानों ने भी खेती के इस मॉडल को अपना लिया है । इस गांव ने दूसरे गावों को भी आधुनिक तरीकों से संगठित होकर खेती करना सिखा दिया है, जिसकी बदौलत हर किसान फायदे में है।