कानपुर में कुख्यात बदमाश विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला, 8 पुलिसकर्मी शहीद

कानपुर में कुख्यात बदमाश विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला, 8 पुलिसकर्मी शहीद

कानपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में कुख्यात बदमाश विकास दुबे को हत्या के प्रयास के मामले में पकड़ने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने अचानक से गोलियां चलानी शुरू कर दी। इस हमले में सर्कल अधिकारी समेत कुल आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए।

कानपुर पुलिस के मुताबिक, हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के ख़िलाफ़ कानपुर के राहुल तिवारी ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया था और इसके बाद पुलिस उसे पकड़ने के लिए बिकरू गाँव गई थी।

यह माना जा रहा है कि विकास दुबे और उसकी गैंग को पुलिस के आने की सूचना पहले ही मिल गई थी और यही वजह है कि बीच मार्ग में जेसबी मशीन खड़ी कर पुलिस के रास्ते को रोकने की कोशिश की गई थी और जैसे ही पुलिस अपनी गाड़ियों से नीचे उतरी बदमाशों ने छत से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस बीच विकास दुबे वहाँ से फरार हो गया। पुलिस का कहना है कि उसकी तरफ से जवाबी कार्रवाई में 2 बदमाश मारे गए हैं।

इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में शहीद पुलिस कर्मियों के परिजनों को सांत्वना देने के साथ ही पुलिस महानिदेशक एच सी अवस्थी से घटना की सारी जानकारी ली और इस मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। डीजीपी पुलिस का कहना है कि सभी बार्डर सील कर दिए गए हैं और एसटीएफ की टीम अपराधियों को पकड़ने में जुट गई है।

उत्तरप्रदेश के कुख्यात बदमाश विकास दुबे के ऊपर 60 से ज़्यादा मामले दर्ज है। गाँव प्रधान और ज़िला पंचायत का सदस्य रह चुका विकास राजनीति में भी पैठ रखने लगा था।   31 अक्टूबर 2017 को एसटीएफ ने लखनऊ के कृष्णानगर क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। कानपुर पुलिस ने उसके ऊपर 25 हजार का इनाम घोषित कर रखा था। उत्तर प्रदेश में राजनाथ सिंह की सरकार के समय विकास दुबे ने 2001 में थाने में घुसकर बीजेपी नेता और राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी। आसपास के इलाकों में उसके खौफ की वजह से किसी ने भी उसके ख़िलाफ़ गवाही नहीं दी और इसी वजह से वह इस मामले से बरी हो गया।