कैफे कॉफी डे के मालिक सिद्धार्थ ने की खुदकुशी, नदी में शव मिला

VG Siddharthaवी जी सिद्धार्थ

मंगलुरू। कैफे कॉफी डे के संस्थापक वी जी सिद्धार्थ का शव मिल चुका है। 60 साल के सिद्धार्थ का शव कर्नाटक की नेत्रावती नदी में मिला । मंगलुरू के पुलिस आयुक्त संदीप पाटिल के मुताबिक दो मछुआरों ने नेत्रावती नदी के उस पुल से लगभग 500 मीटर दूर उनका शव देखा, जहां से उन्होंने सोमवार रात कथित रूप से नदी में छलांग लगाई थी।

तटीय शहर मंगलुरू बेंगलुरू के पश्चिम में लगभग 360 किलोमीटर दूर है। मछुआरों को होइंगे बाजार के करीब उनका शव मिला। उनके शव से शर्ट गायब थी। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सरकारी वेनलॉक हॉस्पिटल भेज दिया गया है। शव को सिद्धार्थ के परिजनों को सौंप दिया जाएगा और अंतिम संस्कार के लिए चिकमंगलुरू ले जाया जाएगा।

सिद्धार्थ की अंगूठी, डिजिटल घड़ी और जूतों से उनकी शिनाख्त की गई।

शव को चिकमंगलुरू में जनता दर्शन के लिए रखा जाएगा और अंतिम संस्कार कॉफी जिला के उनके पैतृक गांव में किया जाएगा।
इससे पहले एक मछुआरे ने ये दावा किया था कि उसने एक शख्स को नेत्रावती नदी के उस पुल से कूदते हुए देखा था ।

लापता होने से दो दिन पहले सिद्धार्थ ने अपने कर्मचारियों को एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें उन्होंने खुलासा किया था कि वे कर्ज में बुरी तरह डूबे हुए थे।

कर्ज़ इतना ज्यादा था कि कंपनी चलाना मुश्किल हो रहा था। इस कारण उन्हें एक आईटी कंपनी माइंडट्री के अपने शेयर बेचने पड़े थे।

उनके पत्र में लिखा था, “अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिशों के बावजूद, मैं मुनाफे वाला बिजनेस मॉडल बनाने में नाकाम रहा हूं। मैं कहना चाहूंगा कि मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। मुझ पर विश्वास करने वाले सभी लोगों को निराश करने लिए मैं माफी मांगता हूं। मैं बहुत लड़ा लेकिन आज मैं हार मानता हूं, क्योंकि एक प्राइवेट इक्विटी पार्टनर के मुझ पर मेरे शेयर वापस लेने का दवाब और नहीं झेल सका।”
इससे पहले सिद्धार्थ  को अंतिम बार जीवित देखने वाले उनके कार चालक बासवराज पाटिल ने मंगलुरू में एक पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया था कि उनके मालिक पुल से लापता हो गए, जहां वह कार से उतरे थे और उसे यह कहकर गए थे कि वह कुछ देर टहलना और कुछ कॉल करना चाहते हैं।

सिद्धार्थ सोमवार की दोपहर बेंगलुरू से हसन के निकट सक्लेशपुर के लिए रवाना हुए थे, जहां उनका एक घर है और एक कॉफी का बागान है। चूंकि वे मंगलुरू मार्ग पर थे तो सिद्धार्थ ने सक्लेशपुर में कुछ देर आराम करने के बाद पाटिल को मंगलुरू चलने के लिए कहा।

सिद्धार्थ बीजेपी के वरिष्ठ नेता एस.एम. कृष्णा के दामाद थे। कृष्णा यूपीए 2 में विदेश मंत्री और कांग्रेस कार्यकाल में ही 1999 से 2004 के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रहे थे।