प्रेगनेंसी में पेटदर्द को ना करें नज़रअंदाज़

आमतौर पर गर्भावस्था में पेट दर्द होना सामान्य बात है लेकिन अगर यह लगातार हो रहा है तो परेशानी बढ़ सकती है। गर्भावस्था में किस तरह का पेट दर्द सामान्य माना जा सकता है और किस तरह का नहीं, इसे समझना जरूरी है।

डॉ. अमरसिंह चूंडावत के मुताबिक कई बार गर्भावस्था के विस्तार जैसे स्वाभाविक कारणों से भी पेट दर्द होते हैं लेकिन ये जानना ज़रूरी है कि पेट दर्द को कब गम्भीरता से लिया जाए।

डॉ. चूंडावत कहते हैं कि पेट दर्द को तब गंभीर माना जा सकता है, जब पेट दर्द के साथ उल्टी, बुखार, ठंड लगना और अचानक असामान्य ब्लीडिंग होने लगे । साथ ही राउंड लिगामेंट दर्द कुछ मिनट के लिए ही होता है ऐसे में यदि पेट में दर्द लगातार है तो मामला गंभीर है। इसके अलावा अगर पेटदर्द से चलना बोलना या सांस लेना भी मुश्किल हो जाए तो इसे गम्भीरता से लिया जाना चाहिए।

पेटदर्द को हो सकते हैं गंभीर परिणाम

गर्भपात : कई बार हर 5-20 मिनट में होने वाले कॉन्ट्रैक्शन, पीठ दर्द, ऐंठन के साथ ब्लीडिंग या बिना ऐंठन के असामान्य ब्लीडिंग और सामान्य तौर पर गर्भावस्था के लक्षणों में अचानक कमी आना गर्भपात के संकेत हो सकते हैं । 

समय से पहले जन्म : पेटदर्द की वजह कई बार बच्चे के समय से पहले जन्म हो जाने का भी संकेत हो सकता है । ऐसा गर्भावस्था के 24 से 37 वें हफ्ते में हो सकता है । बॉर्न टू सून : वल्र्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की ओर से प्रीटर्म बर्थ पर ग्लोबल एक्शन रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कुल 3,519,100 बच्चों का जन्म समय से पहले होता है । डेटा के मुताबिक भारत दुनिया भर में प्रीटर्म बर्थ में 60 फीसदी योगदान देने वाले 10 देशों की सूची में सबसे ऊपर है । ज़रूरी है कि महिलाएं नियमित रूप से जांच कराती रहें । 

प्रीक्लेम्पसिया : 20 हफ्ते की प्रेगनेंट महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत हो सकती है । इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास पर  असर पड़ता है । सिरदर्द, सूजन, पेटदर्द और नजर के धुंधले होने जैसे इसके कई लक्षण हैं।

यूटीआई : कई बार यूटीआई की वजह से भी पेटदर्द की शिकायत हो सकती है । स्टडी के मुताबिक क्रैनबेरी का जूस  पीने से इसमें फायदा होता है । 

अपेंडिसाइटिस : गर्भावस्था के दौरान अपेंडिक्स के  इंफेक्शन की वजह से सर्जरी की नौबत आ जाती है । ऐसा शरीर में होने वाले बदलाव की वजह से होता है । पेट के निचले हिस्से में दर्द, उल्टी और भूख की कमी इसके लक्षण हैं।

गॉलब्लैडर में स्टोन :  अतिरिक्त एस्ट्रोजन की वजह से प्रेगनेंसी के दौरान गॉल ब्लैडर में स्टोन बन सकते हैं । इसकी वजह से पेट में कई बार दर्द उठता है । इसकी वजह ज्यादा वजन, 35 से ज्यादा की उम्र और परिवार किसी को पथरी होना हो सकता है । 

एक्टोपिक गर्भावस्था : महिलाओं को पेट में गंभीर दर्द की शिकायत तब भी होती है जब अंडा, गर्भाशय के अलावा किसी अन्य स्थान पर प्रत्यारोपित हो जाता है। एक्टोपिक गर्भावस्था में गर्भावस्था के 6-10वें सप्ताह के बीच दर्द और रक्तस्राव होता है। 

गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां

-दर्द होने पर तत्काल आराम करें

-पेट के निचले हिस्से में दर्द होने पर गर्म पानी से नहाएं 

– दर्द कम करने के लिए गर्म वॉटर-बॉटल से सिकाई करे

– खाने-पीने का विशेष ध्यान रखें 

– जल्दी पचने वाली चीजें खाएं 

भले ही गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अक्सर पेट दर्द का सामना करना पड़ता है लेकिन पेट के दर्द से जुड़े चेतावनी संकेतों पर नजर रखनी चाहिए और अगर परेशानी बढ़ गई है तो बिना देरी किए डॉक्टर को दिखाना चाहिए ।

आईएएनएस इनपुट के साथ