गाज़ीपुर में विकास को मिली बढ़त, हारता जातितंत्र

गाज़ीपुर में हारता जातितंत्र, विकास को बढ़त

गाज़ीपुर। लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण यानि 19 मई को आठ राज्यों की 59 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। बिहार, उत्तर प्रदेश और हिमाचल की इन सीटों की बात करें तो पिछले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके सहयोगी दलों ने इन सभी सीटों पर जीत हासिल की थी। यूं तो पूरे उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरण और विकास की राजनीति ही मुख्य मुद्दा है लेकिन प्रदेश की गाज़ीपुर सीट में यह लड़ाई पूरी तरह विकास बनाम जातितंत्र की है।

इस सीट पर बीजेपी की तरफ से प्रत्याशी मनोज सिन्हा जहां विकास के नाम पर लोगों से मतदान की अपील कर रहे हैं, वहीं गठबंधन के उम्मीदवार अफजाल अंसारी जातिगत समीकरण पर जीत का सपना देख रहे हैं। अफजाल अंसारी के समर्थक गाजीपुर संसदीय सीट पर यादव, दलित और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या गिनने में जुटे हैं और इन लोगों का मानना है कि यह समीकरण अफजाल अंसारी को जीत दिला सकता है, हालांकि यहां के दलित और यादव समुदाय के कई लोगों की बात पर गौर करें तो गाज़ीपुर में जातितंत्र हारता दिखाई दे रहा है।

 

दलित परिवार ने कहा – हमारा वोट विकास को

गाज़ीपुर के एक दलित परिवार के मुखिया ने अपनी पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि पिछले पांच बरसों से यहां पर विकास के ढेरों काम हुए हैं। उन्होंने कहा कि देश बहुत बदल गया साहब, लेकिन कुछ लोग जात-पात की राजनीति में ही हम लोगों को उलझाए रखना चाहते हैं। दलित परिवार के इस मुखिया का कहना है कि मौजूदा सांसद मनोज सिन्हा जी के प्रयासों से इस इलाके में विकास के ऐसे कई काम हुए, जिस पर पहले किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। गाज़ीपुर के इस दलित व्यक्ति का कहना था कि हमें दुख होता है जब कुछ नेता और पार्टी हम लोगों को अपनी जागीर समझते हैं और हम लोगों को अपना वोट बैंक बताती हैं।

चुपचाप कमल छाप

पश्चिम बंगाल में बीजेपी के प्रचार अभियान में जिस चुपचाप कमल छाप की बात कही गई थी, उसका जिक्र गाज़ीपुर में भी सुनाई दिया। गाज़ीपुर के रामवृक्ष यादव का कहना है कि यहां पर भी पश्चिम बंगाल की तरह ‘चुपचाप कमल छाप’ के आसार ज़्यादा दिखाई दे रहे हैं क्योंकि खुलकर समर्थन करने से जातिगत लड़ाई-झगड़े की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रामवृक्ष  यादव ने इस बात पर खुशी जताते हुए कहा कि कई दलित और पिछड़ी जातियां अब विकास के नाम पर वोट दे रही हैं।

बदली तस्वीर

इलाके के लोगों का मानना है कि केंद्रीय मंत्री और मौजूदा सांसद मनोज सिन्हा के प्रयासों की वजह से आज गाज़ीपुर विकास की मुख्यधारा से जुड़ गया है। गांव की सड़क, बिजली, पानी, शौचालय, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल में सुधार से लेकर गाज़ीपुर समेत पूरे पूर्वांचल में रेलवे के आधुनिकीकरण की वजह से आज मनोज सिन्हा पूर्वांचल में विकास पुरूष के नाम से जाने जाते हैं।

गाज़ीपुर के किसान जो सब्जियां पैदा कर रहे हैं, उसमें उनका मुनाफा बढ़ गया है। मनोज सिन्हा के प्रयास से गाजीपुर घाट स्टेशन पर पेरिशेबल कार्गो की वजह से हरी सब्जियों और खाने पीने की चीज़ों को ताज़ा रखना संभव हुआ। इससे गाज़ीपुर के खेतों से निकली सब्जियां सड़ने से बच गईं और किसानों को भी उनके वाजिब दाम मिलने लगे हैं। गाज़ीपुर में डिजिटल साक्षरता से लेकर तकनीकी शिक्षा की बात हो या फिर मेडिकल कॉलेज की मंजूरी, मनोज सिन्हा के इन कामों ने गाज़ीपुर में जातितंत्र को हरा दिया है और विकासतंत्र की नींव मज़बूत कर दी है, यही वजह है कि गाज़ीपुर में विकास को बढ़त है और जातितंत्र हारता दिखाई दे रहा है।