दुनिया जीतने वाली भारतीय नौसेना की 6 जांबाज़ महिला अधिकारी

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नविका सागर परिक्रमा, 6 महिला नेवी ऑफिसर्स के साहस और शौर्य की कहानी है । चार महाद्वीप और तीन महासागरों की इस जलयात्रा के ऐतिहासिक और बेहद खास होने की कई वजहे हैं । पहली वजह ये है कि आएएनएसवी तारिणी दुनिया का पहला ऐसा इंटरनेशनल शिप है जिसकी सभी क्रू मेंबर्स महिलाएं थीं । ये दरअसल नारी सशक्तिकरण का प्रतीक है । एक बोट से तीन महासागरों की जलयात्रा के दौरान नैविगेशन से लेकर बोट की ज़रूरी मरम्मत तक का काम इन महिला अधिकारियों ने मिलकर किया  ।

जब मौत से करने पड़े दो-दो हाथ

एक बोट से तीन महासागर की यात्रा सुनने में काफी रोमांच पैदा करता है लेकिन ये सिर्फ रोमांचक नहीं है ये बेहद कठिन भी है । हफ्तों तक बीच समंदर में सिर्फ हवा के सहारे आगे बढ़ते रहना बहुत ही मुश्किल काम है । इस टीम ने यात्रा के दौरान साउथ अमेरिका का दुर्गम समुद्री क्षेत्र केपहॉर्न को भी पार किया जिसे समुद्र का माउंट एवरेस्ट कहा जाता है । एटलांटिक और पैसिफिक ओशियन के मिलने वाली इस जगह को खराब मौसम की वजह से जहाज़ों के कब्रिस्तान के तौर पर जाना जाता है । आईएनएस तारिणी की जांबाज़ महिला अफसरों ने भी यहां 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं और 10 फीट ऊंची लहरों का सामना किया था । अपनी 8 महीनों की यात्रा के दौरान इन्होंने 3 बड़े समुद्री तूफानों का सामान किया ।

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जब आगे जाने के लिए था सिर्फ हवा का सहारा 

चुनौतियां इतनी हीं नहीं थीं, इस टीम को अपनी यात्रा के दौरान बोट पर लगा आरओ  सिस्टम खराब हो जाने की वजह से पीने की पानी की दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा । एक बार इनके बोट का स्टीयरिंग गियर भी फेल हो गया, बिना इसकी मरम्मत के ये आगे बढ़ ही नहीं सकते थे लिहाजा इन्हें मॉरीशस में रुकना पड़ा । यहां ये जानना भी जरूरी है कि आईएनएस तारिणी को चलाने के लिए ये टीम पूरी तरह से हवा पर निर्भर थी । हवा से ही इस बोट को गति मिलती थी ऐसे आगे बढ़ने के लिए ये ज़रूरी था कि हवा चलती रहे । इस टीम ने दुनिया का चक्कर लगाते हुए करीब 21 हज़ार 600 नॉटिकल माइल यानि तकरीबन 40 हज़ार किलोमीटर की यात्रा 254 दिनों में पूरी की, जिसमें 199 दिन इन्होंने बीच समंदर में बिताए ।

परिक्रमा पर जाने से पहले दी गई इन बातों की ट्रेनिंग 

भारतीय नेवी ने सागर परिक्रमा की शुरुआत 2009 में की थी, नविका सागर परिक्रमा इसकी तीसरी कड़ी है । इस परिक्रमा का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने किया जबकि लेफ्टिनेंट कमांडर्स प्रतिभा जामवाल, स्वाति, लेफ्टिनेंट्स ऐश्वर्या, एस विजया देवी और पायल गुप्ता  इसके बाकी क्रू मेंबर्स थे । इस टीम ने एक बोट के सहारे दुनिया का भ्रमण शुरू करने से पहले करीब तीन साल तक कड़ी ट्रेनिंग की थी । इस ट्रेनिंग में इन्हें बोट के रखरखाव, नैविगेशन, मौसम का अनुमान लगाने और कम्युनिकेशन से जुड़ी तमाम जानकारियां दी गईं ताकि बीच समंदर में आने वाली किसी भी मुश्किल से ये लड़ सकें ।

कौन हैं ये जांबाज़ महिला अधिकारी 

लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी उत्तराखंड के पौड़ी की रहने वाली हैं । आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाली वर्तिका के माता-पिता दोनों ही प्रोफेसर हैं । वर्तिका पहले भी ऐसे अभियान का हिस्सा रह चुकी हैं । वर्तिका ने इससे पहले ब्राज़ील के रियो डि जिनोरियो से दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन तक पांच हज़ार नॉटिकल मील की दूरी तय की थी ।

हिमाचल के कुल्लू की रहने वाली हैं लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल । बचपन में ही स्कूल जाते वक्त प्रतिभा ने फौजियों से भरे ट्रक को लेह लद्दाख जाते हुए कई बार देखा था तभी से प्रतिभा को सेना में भर्ती होने की इच्छा थी । इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान कॉलेज में इंडियन नेवी ने एक वर्कशॉप का आयोजन किया था, तभी प्रतिभा ने इंडियन नेवी ज्वाइन करने का फैसला कर लिया था ।

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लेफ्टिनेंट कमांडर पी स्वाति का बचपन विशाखापत्तनम में गुज़रा है, यहा नौसेने का बोट क्लब में सेलिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली स्वाति के लिए सेलिंग एक शौक की तरह है, इंडियन नेवी ज्वाइन करने के बाद से अब तक स्वाति पांच बार भूमध्यरेखा पार कर चुकी हैं ।

हैदराबाद की रहने वाली लेफ्टिनेंट ऐश्वर्या बोडापति के पिता नौसेना में हैं इसीलिए नेवी ज्वाइन करना ऐश्वर्या के बचपन का सपना था । पानी से डरने वाली ऐश्वर्या के लिए ये राह आसान नहीं रही है लेकिन अपने डर से लड़ते हुए अब स्वाति इंडियन नेवी के जांबाज़ अफसरों में से एक बन चुकी हैं ।

लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता देहरादून की रहने वाली हैं । इनके पिता विनोद गुप्ता व्यापारी और मां गृहणी हैं । बीटेक करने के बाद पायल ने बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी कर ली थी लेकिन कुछ अलग करने की चाह में पायल ने नेवी ज्वाइन की ।

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मणिपुर राइफल्स के जवान की बेटी हैं लेफ्टिनेंट एस विजया देवी । इनकी मां स्कूल में पढ़ाया करती थीं । 2012 में इंडियन नेवी ज्वाइन करने से पहले एस विजया देवी ने दिल्ली युनिवर्सिटी से अंग्रेज़ी में मास्टर्स डिग्री ली थी । टीवी पर आर्मी से जुड़े सीरियल्स देखते हुए विजया ने आर्मी ज्वाइन करने का फैसला किया था । नेवी ज्वाइन कर विजया ने अपने बचपन के सपने को पूरा किया है ।

जांबाज़ी की मिसाल बन चुकी भारतीय नौसेना की इन महिला अफसरों को कई तरह के सम्मान दिए गए हैं । जिनमें नौसेना मेडल और तेनजिंग नॉर्वे अवॉर्ड्स शामिल हैं ।