कोरोनावायरस से देश और दुनिया की तरक्की में बड़े उलटफेर का ख़तरा

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नई दिल्ली। कोविड-19 कोरोनावायरस महामारी की वजह से एक तरफ देश और दुनिया में लोग अपनी ज़िंदगी बचाने में जुटे हैं तो दूसरी तरफ लॉकडाउन जैसे कदमों ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी है। आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो कोरोनावायरस की वजह से देश और दुनिया की तरक्की में एक बड़े उलटफेर के ख़तरे की आशंका है।

अगर दुनिया में मानव की तरक्की के आकलन की बात की जाए तो इसमें शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और जीवन-स्तर जैसे मापदण्डों का इस्तेमाल किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के मुताबिक इन आधार को वर्ष 1990 में अपनाए जाने के बाद पहली बार दुनिया प्रगति की उल्टी दिशा में चलने के कगार पर है।

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यूएन विकास कार्यक्रम के प्रशासक एखिम श्टाइनर के मुताबिक दुनिया ने 2007-09 के वित्तीय संकट समेत पिछले 30 सालों में कई संकट देखे हैं और इस तरह के संकट ने मानव की तरक्की में कुछ रोड़े तो अटकाए लेकिन फिर विकास के रास्ते पर हर साल हम आगे बढ़ते रहे। हालाँकि, उन्होंने सचेत किया कि कोविड-19 स्वास्थ्य, शिक्षा और आमदनी पर तिहरी मार से इस रुझान को बदल सकता है।”

मानव विकास के बुनियादी क्षेत्रों में गिरावट निर्धन और धनी, हर क्षेत्र में ज़्यादातर देशों में महसूस की जा रही है। कोरोनावायरस की वजह से मृतक संख्या तीन लाख से ज़्यादा हो गई है जबकि वैश्विक स्तर पर प्रति व्यक्ति आय साल 2020 में चार फ़ीसदी गिरने का अनुमान है। इन चुनौतियों का साझा असर मानव विकास में प्रगति की दिशा में बड़े पैमाने पर उलटफेर का सबब बन सकता है।

कोरोनावायरस की वजह से शिक्षा के क्षेत्र पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। मानव विकास में गिरावट उन विकासशील देशों में ज़्यादा दर्ज किए जाने की सम्भावना है जो इस महामारी के सामाजिक व आर्थिक प्रभावों से निपटने में विकसित देशों की तुलना में कम तैयार हैं।

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यूएनडीपी के मानव विकास रिपोर्ट कार्यालय के मुताबिक यह संकट दर्शाता है कि अगर नीतिगत औज़ारों को न्यायसंगत नहीं बनाया गया तो बहुत से देश पीछे रह जाएँगे।

21वीं सदी की इंटरनेट तक पहुँच जैसी ज़रूरतों के नज़रिए से यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे दूरस्थ शिक्षा, दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराए जाने के साथ-साथ घर बैठे काम करना भी संभव बनाया जा सकता है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की तरफ ध्यान देने के साथ ही रोज़गार, लघु एवं मध्यम व्यवसायों और असंगठित सैक्टर में कामगारों के संरक्षण को भी सुनिश्चित करना होगा। इतना ही नहीं, व्यापक आर्थिक नीतियों में सभी के हितों का ध्यान रखने की भी ज़रूरत है।