धनिया निर्यात को प्रोत्साहित करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए आयात को घटाने का रोडमैप

धनिया निर्यात को प्रोत्साहित करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए आयात को घटाने का रोडमैप

नई दिल्ली। दक्षिण पूर्व राजस्थान का हदोती क्षेत्र तथा मध्यप्रदेश का गुना जिला धनिया उत्पादन के लिए जाना जाता है और देश से धनिया के निर्यात में इनका महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब धनिया निर्यात को प्रोत्साहित करने और इसके जरिए किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। भारतीय मसाला बोर्ड तथा डीबीटी-एसएबीसी बायोटेक किसान हब ने आईसीएआर-एनआरसीएसएस, आरएसएएमबी और कोटा कृषि विश्वविद्यालय के जानकारों के साथ इस विषय पर गंभीर चिंतन कर एक रोडमैप तैयार किया है। इसमें विभिन्न राज्यों के सौ से अधिक धनिया उत्पादन से जुड़े किसानों ने भी हिस्सा लिया।

हदोती-गुना क्षेत्र की अपार क्षमता पर विचार करते हुए भारतीय मसाला बोर्ड के अध्यक्ष सह-सचिव डी. साथियान ने उद्यमियों तथा निर्यातकों से साबूत धनिया तथा धनिया, दाल, पाउडर तथा एसेंशियल ऑयल जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात के अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया। मसाला बोर्ड की सदस्य अनुश्री पुनिया ने राजस्थान को अलगा मसाला उत्पादन और निर्यात हब बनाने के लिए सभी विभागों के एकीकृत और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। मसाला बोर्ड के निदेशक पी.एम. सुरेश कुमार ने बताया कि जोधपुर, रामगंज, मंडी (कोटा) तथा गुना में मसाला पार्कों में मसाला बोर्ड ने कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए गए हैं।

आईसीएआर-एनआरसीएसएस, अजमेर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.एस.एस. मीणा तथा कोटा कृषि विश्वविद्यालय, कोटा के निदेशक (शोध) डॉ. प्रताप सिंह ने विभिन्न प्राकृतिक मसालों से विकसित पौधों में सुधार और उनकी स्क्रीनिंग, आईपीएम आधारित श्रेष्ठ कृषि व्यवहारों (जीएपी) के प्रोत्साहन तथा लोंगिया बीमारी पर काबू पाने के लिए आरकेडी-18 तथा एसीआर-1 जैसी बीमारी रोधी किस्मों को लोकप्रिय बनाने पर बल दिया। हाल के वर्षों में हदोती क्षेत्र के धनिया उत्पादक किसानों को इस बीमारी से नुकसान हुआ है।

मसाला बोर्ड के डॉ. श्रीशैल कुलोली, प्रोसेसिंग प्रणाली के माध्यम से सिरका, सौसेज, धनिया पाउडर तथा एसेंसियल ऑयल की ओर ध्यान आकृष्ट किया और इनका मूल्य संवर्धन करने को कहा। मसाला बोर्ड के डॉ. निदेश सिंह बिष्ट ने गुणवत्ता का विषय उठाया और निर्याकों से गुणवत्ता मानकों का पालन करने तथा कीटनाशक अवशेष और स्वच्छता तथा फाइटोसेनेटरी उपायों से निपटने को कहा ताकि जापान, यूरोपीय यूनियन और अमेरिका सहित विकसित देशों की गुणवत्तायुक्त धनिया आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।