बिहार में ‘करे के बा, लड़े के बा, जीते के बा’ जैसे नारे

पटना बिहार में लोकसभा चुनाव के इस मौसम में मतदाताओं को लुभाने के लिए राजनीतिक दल चुनावी नारों के साथ अपनी नैया पार लगाने की कोशिश में जुट गए हैं। बिहार में इस चुनाव में मुख्य मुकाबला विपक्षी दलों के महागठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के बीच माना जा रहा है। दोनों गठबंधन हर दिन नए नए नारों के साथ सामने आ रहे हैं।

बीजेपी ने इस चुनाव में ‘मोदी है तो मुमकिन है’ का नारा दिया है। बीजेपी अपने प्रचार अभियान की टैगलाइन ‘फिर एक बार, मोदी सरकार’ के साथ मैदान में डटी हुई है तो उसकी सहयोगी पार्टी जेडीयू भी इस लोकसभा चुनाव में भी ‘सच्चा है, अच्छा है-चलो नीतीश के साथ चलें’  जैसे नारों के साथ अपना प्रचार कर रही है।

महागठबंधन में शामिल कांग्रेस इस चुनाव में ‘अब होगा न्याय’ के सहारे मतदाताओं को आकर्षित करने में जुटी है।  सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले  आरजेडी  के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव भी इस चुनाव में नारे का जमकर प्रयोग कर रहे हैं। आरजेडी ने अपने खास अंदाज में ‘करे के बा, लड़े के बा, जीते के बा’ के नारे के सहारे एक गीत को लेकर चुनाव मैदान में उतरी है। आरजेडी नेता ‘दुश्मन होशियार, जागा बिहार, किया है ये यलगार, बदलेंगे सरकार’ के जरिए भी कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं।

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बहरहाल, राज्य में चुनाव प्रचार ने अब तेज़ी पकड़ ली है और राजनीतिक दल इन नारों के सहारे मतदाताओं को रिझाने में भी लगे हैं, लेकिन किस पार्टी का नारा मतदाताओं को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रहा है, यह तो चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलेगा।