बिहार में नदियां उफान पर, 6 से ज्यादा ज़िले बाढ़ से प्रभावित

Flood in Supaul, BiharPhoto Credit: Twitter NDRF

पटना। बिहार के साथ नेपाल में हो रही बारिश की वजह से राज्य की कई नदियां उफान पर हैं । राज्य की सभी प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ चुका है ये नदियां कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हेलीकॉप्टर से बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया है।  इसके साथ ही अधिकारियों के साथ बैठकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे कामों की  समीक्षा की है।

बिहार राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, राज्य के छह जिले बाढ़ से प्रभावित हैं,  जहां राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि नदियों में जलस्तर का बढ़ना जारी है जिसकी वजह से नई जगहों पर बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है।

भारी बारिश की वजह से नेपाल से आने वाली नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं।

कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं नदियां

बिहार जल संसाधन विभाग के प्रवक्ता अरविंद कुमार सिंह के मुताबिक लखनदेई नदी मुजफ्फरपुर के गायघाट, बागमती मुजफ्फरपुर के औराई  वहीं कमला बलान और अधवाड़ा नदी दरभंगा में खतरे के निशाना से ऊपर बह रही है।  बागमती नदी हायाघाट, बेनीबाद, डुबाधार, सोनाखान और ढेंग में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि कमला बलान जयनगर और झंझारपुर में, महानंदा ढंगराघाट और झावा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

राहत की बात है कि कोसी के जलस्तर में मामूली कमी आई है। कोसी का जलस्तर वीरपुर बैराज के पास रविवार सुबह छह बजे 2.90 लाख क्यूसेक था जो आठ बजे घटकर 2.64 लाख क्यूसेक हो गया।

गंडक नदी का जलस्तर वाल्मीकिनगर बराज के पास सुबह आठ बजे 90 हजार क्यूसेक था।

सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा में बाढ़ का कहर

सीतामढ़ी के कई इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। बाढ़ ने रीगा में सरकारी कार्यालयों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। दरभंगा जिले में 15 पंचायतों के कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। शिवहर में भी बाढ़ से हालात खराब हो रहे हैं और कई शहरी इलाकों में भी पानी घुस चुका है। अररिया और किशनगंज में भी बाढ़ का पानी नए क्षेत्रों में फैल रहा है।

पूर्वी चंपारण में भी कई गांवों के लोग ऊंची जगहों पर शरण लिए हुए हैं। इस बीच आपदा प्रबंधन विभाग का दावा है कि राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं। कई स्थानों पर सामुदायिक रसोई चलाई जा रही है।