बिहार में बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुटा है मिथिला छात्र संगठन

MSU Volunteers carrying food packetsमिथिला छात्र संगठन के सेनानी

दरभंगा। बाढ़ की विभीषका झेल रहे बिहार में एक गैर राजनीतिक छात्र संगठन काफी मददगार साबित हो रहा है। मिथिला छात्र संगठन सक्रिय होकर उन इलाकों में भी मदद पहुंचा रहा है जहां सरकारी मदद नहीं पहुंच पा रही।

बिहार में बाढ़ की त्रासदी का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसकी वजह से अभी तक सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 80 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। नेपाल में हो रही लगातार बारिश की वजह से आगे हालात और बिगड़ने की आशंका है।

मिथिला छात्र संगठन इस बाढ़ के दौरान दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, बेगुसराय जैसे कई ज़िलों में लगातार सक्रिय है। इस संगठन के सैकड़ों छात्र गांव-गांव जाकर लोगों की मदद कर रहे हैं। खुद को सेनानी कहने वाले ये छात्र खाना, पीने का पानी, सूखा अनाज और दवाइयां लेकर गांवों में जा रहे हैं। कई गांवों में इन्होंने राहत शिविर लगा रखे हैं।  ज़रूरत पड़ने पर ये बाढ़ पीड़ितों के लिए खाना भी बनाते हैं ।

Mithila Student Union relief camp

मिथिला छात्र संगठन का राहत शिविर

हज़ारों लोग हो चुके हैं बेघर

इन दिनों बिहार में अपने घरों में पानी भर जाने की वजह से हज़ारों लोग सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं। बाढ़ में सबकुछ गंवा चुके ये लोग खाने-पीने के लिए पूरी तरह से सरकारी सहायता पर निर्भर हैं ऐसे में युवा छात्रों का ये संगठन इन पीड़ितों की मदद के लिए आगे आ रहा है।

कई गांव ऐसे हैं जहां कच्चे-पक्के हर तरह के मकान धराशायी हो चुके हैं, जिसमें लोगों का  सामान दबा पड़ा है । मिथिला छात्र संगठन के सेनानियों ने ऐसे लोगों की भी मदद की है ।

इसके अलावा ये लोग जानवरों को भी बचाने में लगे हैं। कई बाढ़ पीड़ित अपने जानवरों को लिए बिना जाने को तैयार नहीं हुए तो इस छात्र संगठन के लोगों ने अपने कंधे पर लादकर इन जानवरों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

MSU Volunteer working on ground

मिथिला छात्र संगठन का सेनानी

मिथिला छात्र संगठन के लोगों ने ज़रूरतमंद लोगों को चिकित्सीय सहायता भी मुहैया कराई है। ये अपने साथ डॉक्टर्स को लेकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाते हैं, मेडिकल कैंप लगाकर पीड़ितों की सहायता करते हैं।

कई गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर ये लोग काम कर रहे हैं। इन्होंने सोशल मीडिया के जरिए फंड जुटाया है, संगठन के लोगों ने भी फंडिंग की है इसके अलावा मैथिल समाज के लोग भी मदद के लिए आगे आए हैं। इस संगठन से जुड़े कृष्णा मिश्रा कहते हैं कि ‘अब हालात और मुश्किल होंगे, बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही नुकसान का सही आकलन हो पाएगा। मेडिकल सुविधाएं देनी होंगी। बाढ़ की वजह से हो रही दिक्कतों से उबरने में अभी कई हफ्ते लग जाएंगे’।

सरकार के रवैये से नाराज़ हैं लोग

ज्यादातर इलाकों में बाढ़ पीड़ित सरकारी मदद से नाराज हैं, इनका कहना है कि सरकार हमारे खाते में पैसे तो डाल रही है लेकिन हमारी तात्कालिक ज़रूरत भोजन, पानी और दवाइयों की है । दरअसल सरकार का दावा है कि अभी तक बाढ़ पीड़ितों के खाते में 295 करोड़ रुपए डाले जा चुके हैं।

2015 में बना मिथिला छात्र संगठन इस इलाके में हमेशा सक्रिय रहता है, इस क्षेत्र के विकास के लिए काम कर रहे ये लोग इनदिनों बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं।