बिहार में लालटेन के दिन लदे, सटीक निशाने पर लगा तीर

पटना।  लोकसभा चुनाव में बिहार में सबसे करारा झटका महागठबंधन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय जनता दल को लगा है। लगभग 15 साल तक बिहार की कमान संभालने वाली आरजेडी का बिहार से सूपड़ा साफ हो गया है। महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी भी चित्त हो गई। ऐसे में बिहार में लालटेन के दिन लदते नज़र आ रहे हैं जबकि जेडीयू का तीर सटीक निशाने पर लगा है।

जेडीयू समेत एनडीए में शामिल बाकी पार्टियों ने कमाल का प्रदर्शन किया है। 39 सीटों पर इनकी ऐतिहासिक जीत के सामने विपक्ष चारों खाने चित्त हो गया है। राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने 100 फीसदी स्ट्राइक के साथ लड़ी गई सभी 6 सीटों पर कब्जा कर लिया है। यही हाल बीजेपी का रहा है, बीजेपी ने सभी 17 सीटों पर जीत हासिल की है। जेडीयू ने 16 सीटें अपने खाते में कर ली हैं। जेडीयू, बीजेपी और एलजेपी ने इस बार गठबंधन में चुनाव लड़ा था। बीजेपी और जेडीयू ने 17-17 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे जबकि एलजेपी के खाते में 6 सीटें आईं थीं ।

गठबंधन ने खोल दीं समाजवादी पार्टी परिवार की गाठें     

40 सीटों में से 39 पर कब्जा कर एनडीए ने बिहार में इतिहास रच दिया है। महागठबंधन में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद की पार्टी आरजेडी इस लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खोल पाई, वहीं कांग्रेस को केवल किशनगंज सीट से ही संतोष करना पड़ा। महागठबंधन में शामिल बाकी दल भी धराशायी हो गए। आरजेडी के गठन के बाद यह पहला मौका है जब पार्टी का एक भी सदस्य लोकसभा में नहीं होगा।

महागठबंधन के एक अन्य घटक दल आरएलएसपी को सबसे नुकसान उठाना पड़ा। पिछले चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी ने तीन सीटों पर कब्जा करने में सफल रही थी। उस समय आरएलएसपी एनडीए के साथ थी, लेकिन इस चुनाव में ये पाला बदलकर महागठबंधन के साथ हो गए थे। इस बार पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों पर ही इन्हें हार का सामना करना पड़ा।