बुंदेलखंड में गूंजा नारा, ‘गांव-गांव तालाब बनेगा, तभी हमारा वोट मिलेगा’

बुंदेलखंड

भोपाल लोकसभा चुनाव की तरीखें नजदीक आते ही बुंदेलखंड इलाके में मतदाता अपनी आवाज बुलंद करने लगे हैं। सूखा, पलायन और जल संकट से जूझते लोगों के बीच इन दिनों एक नारा बुलंद हो रहा है, ‘गांव-गांव तालाब बनेगा, तभी हमारा वोट मिलेगा।’ इस नारे को बुलंद करते हुए ग्रामीणों ने मिलकर ‘जल-जीवन संगठन’ का गठन किया है ।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 14 जिलों को मिलाकर बुंदेलखंड बनता है। इस इलाके का लगभग हर गांव गर्मी के मौसम में पानी के संकट से जूझता है। चुनाव आते हैं और पानी उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं और मतदाता यह आस लगा बैठते हैं कि उनकी समस्या का निदान हो ही जाएगा, मगर हर बार वो खाली हाथ रह जाते हैं। इसीलिए खजुराहो संसदीय क्षेत्र के पन्ना जिले के रैपुरा क्षेत्र के 10 गांवों के ग्रामीणों ने मिलकर ‘जल जीवन संगठन’  बनाया है । इस संगठन ने नारा दिया है, ‘गांव-गांव तालाब बनेगा, तभी हमारा वोट मिलेगा।’

पन्ना जिले में देहरादून का लोक विज्ञान संस्थान लोगों को जल संरक्षण के लिए जागरुक करने के लिए अभियान चला रहा है। इसके तहत हर गांव में ग्राम स्वराज समितियां गठित की गई हैं। इन समितियों के सदस्य आमसभा के सदस्य होते हैं। इनमें से फतेपुर, बिरमपुरा और बिलपुरा ग्राम पंचायतों की समितियों के प्रतिनिधियों ने राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों पर दबाव बनाने के लिए ‘गांव-गांव तालाब बनेगा, तभी हमारा वोट मिलेगा’ अभियान चलाने का फैसला किया ।

ये लोग चाहते हैं कि जो भी नेता चुनकर आए वो पानी की दिक्कत स्थाई रूप से खत्म करने की दिशा में काम करे। तालाब बनाए जाएं ताकि जल संरक्षण किया जा सके। जल संरक्षण से गर्मी में पानी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

लंबे अरसे से बुन्देलखंड में सूखे के हालात हैं । जलवायु परिवर्तन की वजह से इस पूरे इलाके में अनियमित बारिश होने लगी है। मॉनसून के दिनों में बारिश 50-60 से घटकर 20-25 दिन ही होती है । ऐसी स्थिति में अगर सामान्य बारिश हो भी जाए, तो भी खेती का अकाल और पीने के पानी का संकट बढ़ता जा रहा है। ऐसे में बुंदेलखंड में जल संरक्षण के बिना इस समस्या का समाधान नहीं दिख रहा। आंकड़ों के मुताबिक बुंदेलखंड पैकेज के तहत आई राशि में से 3 फीसदी ही तालाबों पर खर्च की गई है।

आंकड़े बताते हैं कि बुंदेलखंड में कभी 10,000 तालाब हुआ करते थे। मगर अब यह आंकड़ा 1,000 से 2,000 के बीच ही रह गया है। जल संकट गहराने का कारण ही तालाबों का खत्म होना माना जा रहा है। इसीलिए अब तालाबों की आवाज बुलंद हो चली है।

बुंदेलखंड क्षेत्र में मध्य प्रदेश के चार -टीकमगढ़, खजुराहो, सागर व दमेाह- और उत्तर प्रदेश के चार -झांसी, जालौन, हमीरपुर व बांदा- संसदीय क्षेत्र आते हैं।