मक्खन के ‘ट्विस्ट’ के साथ बनता है दावणगेरे बेन्ने डोसा

image of dosaप्रतीकात्मक तस्वीर

बात चाहे भाषा की हो या फिर वेश-भूषा की, भारत काफी समृद्ध देश है । हर राज्य की अपनी अलग संस्कृति है, खास पर्व-त्योहार, रीति रिवाज़ और खान-पान है । भाषा से लेकर खान-पान तक इतनी विविधता शायद ही दुनिया के किसी और देश में हो। एक राज्य के अंदर भी कई तरह की विविधता देखने को मिलती है । कर्नाटक भी एक ऐसा ही राज्य है । कर्नाटक के एक खास शहर का एक ऐसा ही खास व्यंजन है बेन्ने डोसा ।

दक्षिण भारत का व्यंजन है डोसा, आम तौर पर पूरे देश में डोसे की कई वैरायटी मिलती है लेकिन दावणगेरे का बेन्ने डोसा इस जगह की पहचान के साथ जुड़ा है । यानि बेन्ने डोसा का लुत्फ लेना हो तो दावणगेरे से बेहतर कोई जगह नहीं । दावणगेरे मध्य कर्नाटक का एक शहर है जो कर्नाटक के विशिष्ट खान-पान की विरासत को आज तक सहेजे हुए है। ऐसे कई व्यंजनों में से एक बेन्ने डोसा सबको अपनी तरफ खींचता है ।

कन्नड़ में बेन्ने का मतलब मक्खन होता है, तो हिंदी में आप इसे मक्खन डोसा कह सकते हैं । बेन्ने डोसा आमतौर पर मिलने वाले डोसे से ना सिर्फ अलग दिखता है बल्कि इसका स्वाद भी काफी अलग होता है । इसके लिए डोसे का घोल बनाते वक्त चावल, उड़द और मेथी दानों के अलावा मुरमुरे का भी इस्तेमाल करते हैं, वहीं इसे बनाते वक्त इसमें सफेद ताज़ा मक्खन डाला जाता है । इसे इस तरह पकाया जाता है कि ऊपरी परत कुरकरी होती है लेकिन अंदर का हिस्सा मुलायम रहता है । ताजे मक्खन की वजह इसका स्वाद काफी उम्दा हो जाता है, मक्खन ही इसकी खासियत है । इस डोसे को नारीयल की तीखी चटनी और उबले हुए आलू के साथ सर्व किया जाता है । आलू में नाम मात्र के लिए नमक वगैरह मिलाया जाता है । बेन्ने डोसा या मक्खन डोसे की लोकप्रियता इतनी है कि कर्नाटक आने वाले लोग दावणगेरे जाकर एक बार इसका स्वाद ज़रूर लेते हैं ।