मध्यस्थता से सुलझाएं अयोध्या विवाद, मीडिया को कवरेज की इजाज़त नहीं: सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court on Ayodhya

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मसले को सुलझाने के लिए तीन सदस्यों का पैनल गठित कर दिया है । कोर्ट ने ये मामला मध्यस्थता से ही सुलझाने के आदेश दिए हैं ।

मध्यस्थता के लिए गठित पैनल के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश मोहम्मद इब्राहिम खलीफुल्ला हैं, इनके साथ आर्ट ऑफ लीविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू मिलकर मध्यस्थता से मामले को सुलझाने की कोशिश करेंगे ।

अयोध्या

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इससे पहले भी मध्यस्थता के ज़रिए मामले को सुलझाने की कई बार कोशिशें की गई हैं लेकिन को नतीजा नहीं निकला है। अहम बात ये है कि इस बार इस मामले की रिपोर्टिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है । अखबार या न्यूज़ चैनल मामले की कवरेज नहीं कर पाएंगे लिहाजा मध्यस्थता की सारी कवायद गोपनीय होगी । अदालत ने मध्यस्थता प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे लोगों के मीडिया से बात करने पर भी रोक लगा दी है। मध्यस्थता की प्रक्रिया फैजाबाद में एक हफ्ते के अंदर शुरू होगी ।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय बेंच ने ये फैसला सुनाया है। मध्यस्थता के लिए कोई विशेष दिशा-निर्देश नहीं जारी किए गए हैं। कोर्ट ने कहा है कि अगर मध्यस्थ चाहें तो कानूनी सहायता ले सकते हैं ।  

श्रीश्री रविशंकर ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर की है, इन्होंने ट्वीट किया है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मध्यस्थता को देश और मामले से जुड़े सभी पक्षों के हित में है। इस विवाद को मैत्रीपूर्ण रूप से सुलझाने का पूरा प्रयास करना चाहिए।

अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही पाँच सदस्यीय बेंच  में  चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं ।

आईएएनएस इनपुट के साथ