यहां मुखौटा नृत्य से मनाते हैं हर खास मौके का जश्न

Arunachal Pradesh Mask DanceArunachal Pradesh Mask Dance

ईटानगर । अरुणाचल प्रदेश जितना प्राकृतिक रूप से खूबसूरत है उतनी ही खूबसूरत है यहां की कला और संस्कृति । अरुणाचल में कई जनजातियां रहती हैं। ये जानना दिलचस्प है कि लगभग हर जनजाति की एक विशेष नृत्य शैली है । ईश्वर को प्रसन्न करना हो, नई फसल की खुशी मनानी हो या फिर, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना हो, ये जनजातियां हर मौके को पारंपरिक नृत्य के ज़रिए मनाती हैं । रंग बिरंगे कपड़े, आभूषण और मुखौटों  की वजह से इन नृत्य के लिए आकर्षण और बढ़ जाता है । जब भी अरुणाचल प्रदेश की कला संस्कृति की बात होती है मुखौटा नृत्य का ज़िक्र ज़रूर आता है ।

अरुणाचल प्रदेश में कई तरह का मुखौटा नृत्य किया जाता है जो अलग-अलग जनजातियों से जुड़ा हुआ है । मोनपा, खंपति और शेरदुकपेंस जनजातियां कई तरह के मुखौटा नृत्य करती हैं, याक नृत्य, का फिफाई नृत्य, तोरग्या नृत्य, शेर और मोर नृत्य इनमें शामिल हैं ।

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याक नृत्य खास तौर पर तवांग मठ के आस-पास रह रहे बौद्ध करते हैं । बौद्ध याक को समृद्धि का प्रतीक मानते हैं। कई कलाकार याक जैसी दिखने वाली ड्रेस पहनते हैं और एक साथ नृत्य करते हैं । अरुणाचल प्रदेश में रहने वाली कुछ जनजातियां का फिफाई नृत्य करती हैं । इसके जरिए एक कहानी बताई जाती है, ये कहानी आत्माओं से अपनी जनजाति की लड़कियों की रक्षा की कहानी है । तवांग मठ के आसपास रहने वाली मोनपा जनजाति तोरग्या नृत्य करती है । इनका डांस फेस्टिवल तीन दिनों तक चलता है । तवांग मठ के आंगन में होने वाले इस कार्यक्रम में बौद्ध भिक्षु भी हिस्सा लेते हैं। तोरग्या नृत्य में खास तरह  के मुखौटे पहने जाते हैं । ये नृत्य बुराई के अंत का प्रतीक है ।