राजस्थान : मनमुटाव तभी से था जब साफा बाँधकर सचिन तैयार थे और मुख्यमंत्री बना दिए गए गहलोत

राजस्थान : मनमुटाव तो उसी दिन से था जब साफा बाँधकर सचिन तैयार थे और मुख्यमंत्री बना दिए गए गहलोत

जयपुर । राजस्थान में ताज़ा सियासी खींचतान की बात करें तो यह विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में सचिन पायलट को एसओजी यानि स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप से मिलने वाली नोटिस है। वैसे 10 जुलाई का यह नोटिस उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी भेजा गया था। हालाँकि, यह लड़ाई तो 17 दिसंबर 2018 को उसी दिन से चल रही है, जब सचिन पायलट साफा पहनकर तैयार थे और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अशोक गहलोत को मिल गई।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, ए.टी.एस एवं एस.ओ.जी. राजस्थान के कार्यालय से 10 जुलाई को जारी किया यह नोटिस धारा 160 जा.फौ. के अंतर्गत जारी किया है जिस पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं अनुसंधान अधिकारी हरिप्रसाद के हस्ताक्षर हैं। अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों के नाम से अलग-अलग भेजे गए इस नोटिस की भाषा एक ही है जिसमें यह उल्लेख किया गया है कि

“ प्रकरण संख्या 47/2020 दिनाँक 10.07.2020 अन्तर्गत धारा 124 ए, 120 बी आई.पी.सी पुलिस थाना एसओजी, जयपुर में अनुसंधान किया जाना है। इस सम्बन्ध में आपके बयान पंजीबद्ध किये जाने हैं। लिहाजा श्रीमान से निवेदन है आप उचित समय, दिनाँक व स्थान से अवगत करायें ताकि आपके बयान पंजीबद्ध किये जा सकें।  ”

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भले ही इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहे हों लेकिन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट इसको लेकर अच्छे ख़ासे ख़फ़ा हैं। पिछले दिनों एसओजी ने खरीद-फरोख्त के मामले में भरत मालानी और अशोक सिंह नाम के दो लोगों को गिरफ्तार भी किया था। इन लोगों के कांग्रेस विधायकों से संपर्क में होने की बात सामने आई थी।

इधर, 10 जुलाई की देर रात से ही उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों और मंत्रियों के साथ दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। हालाँकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस पूरे प्रकरण पर भारतीय जनता पार्टी पर सवाल खड़े कर रहे हैं और उनका कहना है कि बीजेपी अपनी ताक़त और धनबल का इस्तेमाल कर राजस्थान में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करनी चाहती है।

दरअसल, 2018 में विधानसभा चुनाव के वक्त भी बतौर प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस की ज़िम्मेदारी सचिन पायलट पर थी और उन्होंने दिन-रात मेहनत कर राज्य में कांग्रेस की नींव मज़बूत की लेकिन जब नतीजों के बाद कांग्रेस को बहुमत मिला तो मुख्यमंत्री की कुर्सी अशोक गहलोत को मिल गई और सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री बनकर ही संतोष करना पड़ा।

राजस्थान में सरकार बनने के बाद भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच तनातनी की ख़बरें आती रहीं। सचिन पायलट से जुड़े लोगों का कहना है कि अशोक गहलोत और उनके समर्थक प्रदेश में विकास के काम पर ध्यान देने की बजाय दिन-रात सचिन पायलट की जड़ों को कमज़ोर करने में जुटे रहते हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस का एक बड़ा खेमा ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कुछ ऐसा ही बर्ताव करता था जिसकी वजह से राज्य में पार्टी के हाथ से सत्ता निकल गई।