राष्ट्र निर्माण, विकास के लिए टैक्स बढ़ाना उतना ही ज़रूरी जितनी सुरक्षा: सीतारमण

Nirmala SitharamanPhoto Credit: Twitter Ministry of Finance

नई दिल्ली। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि अति समृद्ध लोगों पर आयकर सरचार्ज में बढ़ोतरी करना राष्ट्र के निर्माण की दिशा में एक छोटा सा योगदान है। वित्त मंत्री ने इसके साथ अमीर लोगों की आय पर सरचार्ज बढ़ाने के मसले पर दोबारा सोचने की बहस को ख़ारिज कर दिया है।

निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में आम बजट पर चर्चा के दौरान जवाब देते हुए कहा कि उनके बजट में आर्थिक विकास को उतना ही तवज्जो दिया गया है जितना राष्ट्रीय सुरक्षा को।

सीतारमण ने पिछले हफ्ते संसद के बाहर भी ऐसी ही बातें कहीं थीं, उन्होंने कहा था कि देश के निर्माण में हर भारतीय को योगदान देने की ज़रूरत है।

बजट में ऊंची कमाई वाले लोगों पर सरचार्ज 39 फीसदी से बढ़ाकर 42.7 फीसदी कर दिया गया था। बजट में इस ऐलान के साथ ही शेयर बाज़ार में भारी गिरावट आई थी और दो दिनों में निवेशकों की 3.5 लाख करोड़ रुपये की रकम डूब गई।

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बंबई स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख शेयर सूचकांक सेंसेक्स बुधवार को भी 174.7 अंक नीचे बंद हुआ।

एफपीआई पर होगा सरचार्ज बढ़ोतरी का असर

वित्त मंत्रालय के विश्लेषण के मुताबिक ऊंची आय वाले लोगों पर सरचार्ज की बढ़ी हुई दरों से आने वाले 40 फीसदी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) पर असर पड़ेगा।

एफपीआई इस ऊंची कर दर के अंतर्गत आ जाते हैं क्योंकि वे एसोसिएशन ऑफ पर्संस या ट्रस्ट जैसी नॉन-कॉरपोरेट संस्था के रूप में निवेश करते हैं जो आयकर कानून में व्यक्ति के रूप में वर्गीकृत हैं।

हालांकि सीबीडीटी के चेयरमैन पी. सी. मूडी के मुताबिक इस अतिरिक्त सरचार्ज से बचने के लिए एफपीआई और एआईएफ (अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट फंड) को कॉरपोरेट की संरचना में बदला जा सकता है।

इससे पहले, अधिक दौलतमंद लोगों पर कर का भार बढ़ाने को उचित ठहराते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा कि भारत में कर की सर्वाधिक दर अभी भी अमेरिका और चीन समेत कई देशों से कम है। दुनियाभर में ज्यादा अमीर लोगों को अतिरिक्त कर चुकाने के लिए कहा जाता है।

राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय ने कहा कि चीन और दक्षिण अफ्रीका में कर की सबसे ऊंची दर 45 फीसदी है और अमेरिका में यह 50.3 फीसदी है।