आदिवासी पेंटिंग और कलाकृति को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में लाने के लिए कारगर हो सकते हैं ई-प्लेटफार्म  

वन उपज से लेकर आदिवासी हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में लाने के लिए कारगर हो सकते हैं ई प्लेटफार्म  

नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी का असर आदिवासी समुदाय की आजीविका पर भी प़ड़ा है और अब इस दिशा में केंद्र सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय आदिवासी समाज से जुड़े कारोबार को डिजिटल तक़नीक के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से जोड़ने की कोशिश में जुट गया है।

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री मंत्री अर्जुन मुंडा का कहना है कि ‘ट्राइफेड वारियर्स’ की टीम आदिवासी जीवन में बदलाव लाने और उनकी आजीविका को मजबूती प्रदान करने के लिए वन उपजों, हथकरघा एवं हस्तशिल्प पर आधारित जनजातीय व्यापार को एक नई ऊँचाई पर ले जाएगी। यह बात उन्होंने ट्राइफेड डिजिटल प्लेटफॉर्म को लॉन्च करने के लिए एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। ‘ट्राइफेड गोज डिजिटल’ और “बी वोकल फॉर लोकल’ #गो ट्राइबल” को ध्यान में रखते हुए इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन ट्राइफेड ने किया।

उन्होंने कहा कि विभिन्न आवश्यकताओं – चाहे व्यापार संचालन हो, खरीदारी और सूचना हो- को पूरा करने के लिए अधिक से अधिक लोगों के ऑनलाइन होने के साथ वे डिजिटलीकरण अभियान में सम्मिलित हो रहे हैं ताकि गांव आधारित आदिवासी उत्पादकों को मानचित्र पर लाकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अत्याधुनिक ई-प्लेटफॉर्मों की स्थापना की जा सके, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।

ट्राइफेड के अध्यक्ष रमेश चंद मीणा का मानना है कि आने वाले दिनों में 2 लाख करोड़ रुपये की आदिवासी अर्थव्यवस्था निश्चित रूप से दोगुनी या तिगुनी हो जाएगी। ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक, प्रवीर कृष्ण ने वेबिनार के माध्यम से बताया कि डिजिटल तकनीक की वजह से 50 लाख से अधिक आदिवासियों (कारीगरों, संग्रहकर्ताओं, निवासियों) को निष्‍पक्ष और समान अवसर मिल सकते हैं।

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डिजिटल रणनीति में पूरी आपूर्ति-मांग आदिवासी श्रृंखला, प्रत्येक चरण को ध्यान में रखा गया है, और इसमें एक अत्याधुनिक वेबसाइट (https://trifed.tribal.gov.in) जिसमें संगठन और विभिन्‍न आदिवासी कल्‍याण योजनाओं; व्‍यापार के लिए आदिवासी कारीगरों के लिए ई-मार्केट प्‍लेस की स्‍थापना करने; उनके उत्‍पादों के सीधे विपणन; वन धन योजना से जुड़े वनवासियों से संबंधित पूरी जानकारी का डिजिटलीकरण, ग्रामीण हाटों और उनसे जुड़े गोदामों से संबंधित पूरी जानकारी है।

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आदिवासी जीवन और व्‍यापार के हर पहलू को ध्यान में रखते हुए, ट्राइफेड ने सरकारी और निजी व्यापार और आदिवासियों को संबंधित भुगतान के माध्यम से एमएफपी की खरीद के डिजिटलीकरण की शुरुआत की है। ई-व्‍यापार में अचानक आई तेजी का लाभ उठाते हुए, ट्राइब्‍स इंडिया के उत्पाद www.tribesindia.com पर उपलब्ध हैं। सभी क्षेत्र यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं कि विविध प्रकार की वस्‍तुएं और प्रस्‍ताव अन्‍य प्‍लेटफॉर्मों जैसे एमेजॉन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, पेटीएम और शॉपक्लूज पर आसानी से उपलब्ध हों। इन उत्पादों में रचनात्मक कृतियां और कलाकृतियां जैसे डोकरा धातु शिल्प, सुंदर मिट्टी के बर्तन, विभिन्न प्रकार के चित्रों से लेकर रंगीन, आरामदायक परिधान, विशिष्ट आभूषण और जैविक और प्राकृतिक खाद्य और पेय पदार्थ शामिल हैं।