विकसित भारत का जो सपना डॉ. कलाम ने देखा था, उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी साकार करने में जुटे हैं

विकसित भारत का जो सपना डॉ. कलाम ने देखा था, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उसे साकार करने में जुटे हैं

अर्जुन राम मेघवाल

विकसित भारत का जो सपना डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम ने देखा था, मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उसे साकार करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत के लिए प्रधानमंत्रीजी के आह्वान ने हमारे अब तक के प्रयासों को और गति प्रदान की है। अग्रणी क्षेत्रों की पहचान, दुनिया भर की सर्वोत्तम कार्यशैलियों का समन्वय और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना, स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहित करना आदि भारत को डॉ. कलाम के सपनों का सुपरपावर बनाने की दिशा में ही उठाए गए कुछ ठोस कदम हैं। सरकार की कार्यशैली से स्पष्ट है कि वह विभिन्न क्षेत्रों में देश को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बढ़ रही है। राष्ट्र निर्माण के लिए 17वीं लोकसभा में, संसद सदस्यों ने संजीदगी और सक्रियता का परिचय दिया है।

आज दुनिया एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। इससे उबरने के लिए देश-विदेश की सारी संस्थाएँ कई मोर्चों पर परस्पर सहयोग कर रही हैं। संघर्ष के इस समय में, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की यह बात मानवजाति के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है कि यह धरती ही एक मात्र उपग्रह है, जहाँ जीवन संभव है। मानवजाति को इसकी रक्षा और संरक्षण का दायित्व निभाना ही होगा। हमारा समाज और हमारी शासन प्रणाली अब पहले से कहीं अधिक संजीदा है क्योंकि मामूली सी देरी से भी अपूरणीय क्षति हो सकती है। इन परिस्थितियों ने मनुष्य की चेतना को झकझोर दिया है क्योंकि ये परिस्थितियाँ प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की व्यथा-कथा बयाँ कर रही हैं।

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भविष्य को ध्यान में रखते हुए इन संसाधनों के संतुलित उपयोग की बात पर कभी अमल किया ही नहीं गया, हालाँकि, दुनिया भर की संस्थाओं ने स्वीकार किया है कि ऐसा किया जाना चाहिए। भारतीय मूल्य और लोक व्यवहार धरती को सुरक्षित बनाए रखने और इसके संरक्षण की भावना से अनुप्राणित रहे हैं। आज इस धरती को जितना खतरा दुनिया भर में बढ़ते तापमान और प्रदूषण से है, उतना ही खतरा मानव-निर्मित कारकों से भी पैदा हुआ है। भारत में बेहतर शासन प्रणाली के साथ-साथ जनांकिकी लाभ भी है क्योंकि यहाँ 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है जो भारत को एक ऐसा विकसित देश बनाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं जिनसे विश्व समुदाय भी धरती को रहने योग्य बनाए रखने की कला सीख सकता है।

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भावी पीढ़ी के लिए इस धरती पर बेहतर जीवन छोड़ने की आकांक्षा से कई प्रज्ञापुरुषों ने अपने ज्ञान और बुद्धिमत्ता से समाज को प्रेरित किया है। पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन भी प्रकृति के संरक्षण की दिशा में हमें काफी कुछ सीख देने वाला है। आज उनकी 5वीं पुण्यतिथि का यह अवसर रोजमर्रा के जीवन में कलाम की बुद्धिमत्ता का स्मरण और अंगीकरण ही उन महान आत्मा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने अपनी काव्यात्मक शैली में, हमें व्यक्तिगत और सामूहिक- दोनों स्तरों पर भारत को 2020 तक विकसित बनाने के लिए प्रेरित किया था।

आधुनिक समय की जटिलताओं के समाधान और भारत को 21वीं सदी का अग्रणी देश बनाने के प्रयास तेज करने के लिए हमें समस्या का समाधान करने की कला सीखनी होगी ताकि वह विकराल रुप न धारण कर ले। समकालीन और भावी चुनौतियों का समाधान करने तथा भारत को विकासशील से विकसित देश बनाने की दिशा में भारत की परिवर्तनकारी यात्रा की दृष्टि से, मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध और आमजन में जनता के राष्ट्रपति नाम से प्रसिद्ध डॉ. कलाम के विचार राष्ट्र के लिए हमेशा प्रासंगिक बने रहेंगे। डॉ. कलाम ने राजनेताओं से अपील की थी कि वे देश के टिकाऊ विकास के लिए राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दें और इसे व्यवहार में भी लाएँ। डॉ. कलाम ने कहा था कि राष्ट्रीय विकास के मुद्दों के समाधान के लिए सभी को साथ मिलकर काम करना चाहिए।

कर्मयोगी कलाम एक असाधारण वैज्ञानिक प्रतिभासंपन्न व्यक्ति के अलावा एक कवि, लेखक और कठिन परिश्रम करने वाले व्यक्ति भी थे। उनका कार्य और उनकी बुद्धिमत्ता भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एवं हमारी पृथ्वी को जीवन के लिए और सुगम व उपयोगी बनाने की दिशा में सदैव हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी। व्यक्ति के स्तर पर किए जा रहे परिवर्तनों को सामूहिक परिवर्तनों में बदले जाने की आवश्यकता है ताकि भारत डॉ. कलाम के सपनों सा विकसित देश बन सके। आज उनकी पुण्यतिथि इस महान आत्मा के विचारों के प्रति संकल्पित होने का दिवस है।

 

अर्जुन राम मेघवाल – भारत सरकार में संसदीय कार्य, भारी उद्योग एवं लोक उद्यम राज्य मंत्री हैं और लोकसभा में बीकानेर संसदीय क्षेत्र  का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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