12 मई को मध्य प्रदेश की 8 सीटों पर चुनाव, कई दिग्गजों के भाग्य का होगा फैसला

मध्य प्रदेश

भोपाल। लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 12 मई को कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, बीजेपी के केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के राजनीतिक भाग्य का फैसला होने वाला है। इस चरण में राज्य की जिन आठ सीटों पर मतदान होना है उनमें से सात सीटें फिलहाल बीजेपी के कब्जे में हैं।

राज्य में लोकसभा की 29 सीटें हैं। इनमें से 13 सीटों पर दो चरणों में मतदान हो चुका है। 12 मई को भिंड, मुरैना, ग्वालियर, गुना, राजगढ़, सागर, भोपाल और विदिशा लोकसभा सीट के लिए मतदान होना है। इनमें सिर्फ गुना संसदीय क्षेत्र कांग्रेस का कब्जा है। बाकी सभी सीटों पर 2014 में बीजेपी काबिज हुई थी।

भोपाल लोकसभा सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प है जिसपर देश भर की निगाहें लगई हुई हैं। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह के खिलाफ साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को उतारकर बीजेपी ने ये मुकाबला दिलचस्प बना दिया है।

दिग्विजय सिंह के समर्थन में साधु संत कर रहे हैं चुनाव प्रचार

साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ चुनाव लड़ रहे दिग्विजय सिंह के समर्थन में भी साधु-संत रैली करते नज़र आ रहे हैं। इसकी वजह से साध्वी प्रज्ञा की रैलियों के साथ-साथ कांग्रेस की रैलियों में भी भगवा रंग नज़र आ रहा है। चुनाव में ध्रुवीकरण की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है। भोपाल लोकसभा सीट पर 1984 से अब तक बीजेपी काबिज है ।

गुना संसदीय क्षेत्र कांग्रेस और खासकर ग्वालियर के सिंधिया राजघराने का गढ़ माना जाता है। यहां से चार बार से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। इस बार उनका मुकाबला बीजेपी के केपी यादव से है। यादव कभी सिंधिया के करीबी हुआ करते थे और उनके सांसद प्रतिनिधि रहे हैं, लेकिन इस बार उन्हीं के खिलाफ चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। इस लोकसभा क्षेत्र से सिंधिया राजघराने के सदस्यों ने 14 बार प्रतिनिधित्व किया है।

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इसी तरह ग्वालियर संसदीय क्षेत्र को भी सिंधिया राजघराने के प्रभाव वाला माना जाता है, मगर यहां से बीते तीन चुनावों से बीजेपी उम्मीदवार जीतते आ रहे हैं। इस बार मुकाबला कांग्रेस के अशोक सिंह और बीजेपी के विवेक शेजवलकर के बीच है। अशोक सिंह बीते दो चुनावों से हारते आ रहे हैं। इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व अटल बिहारी वाजपेयी, विजया राजे सिंधिया, माधवराव सिंधिया, यशोधरा राजे सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर कर चुके हैं।

मुरैना लोकसभा सीट के लिए बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पर दांव लगाया है। तोमर ने पिछला चुनाव ग्वालियर से जीता था। तोमर का मुकाबला कांग्रेस के राम निवास रावत से है। रावत अभी हाल ही में विधानसभा चुनाव हारे थे। रावत की गिनती सिंधिया के करीबियों में होती है। इस सीट पर 1996 से बीजेपी का कब्जा है।

राजगढ़ संसदीय क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के प्रभाव वाली सीट मानी जाती है। इस सीट से कांग्रेस ने मोना सुस्तानी को उम्मीदवार बनाया है, तो दूसरी ओर पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद बीजेपी ने यहां से मौजूदा सांसद रोडमल नागर को दोबारा मैदान में उतारा है।

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राज्य की विदिशा संसदीय सीट पर इस बार मुकाबला दो नए चेहरों के बीच है। बीजेपी ने जहां रमाकांत भार्गव को मैदान में उतार है तो कांग्रेस ने शैलेंद्र पटेल पर दांव लगाया है। इस सीट पर पिछली बार सुषमा स्वराज ने जीत दर्ज की थी । इस सीट का प्रतिनिधित्व अटल बिहारी वाजपेयी, शिवराज सिंह चौहान जैसे नेता कर चुके हैं।

भिंड और सागर संसदीय सीटों पर मुकाबला नए चेहरों के बीच है। भिंड से बीजेपी ने संध्या राय और कांग्रेस ने देवाशीष जरारिया को मैदान में उतारा है। वहीं सागर में बीजेपी के राजबहादुर सिंह का मुकाबला कांग्रेस के प्रभु सिंह ठाकुर से है।